तिरुवनंतपुरम का ताड़पत्र पांडुलिपि संग्रहालय केंद्रीय अभिलेखागार की आठ दीर्घाओं में ऐतिहासिक दस्तावेज़ों को एक साथ प्रस्तुत करता है। अगर आपकी दिलचस्पी केरल के इतिहास में है, तो यहाँ की प्रदर्शनियाँ लेखन और प्रशासन से लेकर व्यापार, संस्कृति और मंदिर के अभिलेखों तक कई विषयों की पड़ताल करती हैं।
- स्थान: केंद्रीय अभिलेखागार, फ़ोर्ट इलाका, तिरुवनंतपुरम
- दीर्घाएँ: आठ, जिनमें इतिहास के कई विषय शामिल हैं
- प्रवेश और समय: मंगलवार से रविवार खुला रहता है; सोमवार बंद रहता है

ताड़पत्र पांडुलिपि संग्रहालय के बारे में
ताड़पत्र पांडुलिपि संग्रहालय तीन शताब्दी पुराने परिसर की भूतल पर है, जहाँ केंद्रीय अभिलेखागार भी स्थित है। केरल पर्यटन इसे दुनिया का पहला ताड़पत्र पांडुलिपि संग्रहालय बताता है। इसका प्रबंधन केरल राज्य अभिलेखागार विभाग करता है और इसे केरल म्यूज़ियम ऑफ़ हिस्ट्री एंड हेरिटेज के सहयोग से विकसित किया गया था।

यह संग्रह क्या दर्शाता है
दीर्घाओं में पांडुलिपियों को विषयों के आधार पर सजाया गया है, जिससे आप दस्तावेज़ों को उनकी उम्र और रूप से आगे बढ़कर समझ सकते हैं। अभिलेखागार विभाग के पास एक करोड़ ताड़पत्रों का संग्रह है, जबकि संग्रहालय की आठ दीर्घाओं में 187 पांडुलिपियाँ प्रदर्शित हैं।
इनके विषय हैं: लेखन का इतिहास; भूमि और लोग; प्रशासन; युद्ध और शांति; शिक्षा और स्वास्थ्य; अर्थव्यवस्था; कला और संस्कृति; और मथिलकोम अभिलेख। मिलकर ये प्रदर्शनियाँ त्रावणकोर के प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति से जुड़ी सामग्री प्रस्तुत करती हैं। केरल पर्यटन के अनुसार, यह राज्य 19वीं शताब्दी के अंत तक 650 वर्षों तक अस्तित्व में रहा।
कुछ दीर्घाओं में रोज़मर्रा और संस्थागत अभिलेखों पर विशेष ध्यान दिया गया है। ‘भूमि और लोग’ में मकान के पट्टों, ऋण, स्वामित्व, कर और रखरखाव के कामों से जुड़े दस्तावेज़ हैं, जबकि ‘प्रशासन’ में सरकारी नियुक्तियों, हथियारों और गोला-बारूद की खरीद, कानूनों और सचिवालय से संबंधित सामग्री शामिल है। ‘अर्थव्यवस्था’ दीर्घा में ओझुकु नाम से जाने जाने वाले भूमि-माप के अभिलेख, आकलन, कर संबंधी दस्तावेज़ और अलप्पुझा सीमा से जुड़े रिकॉर्ड हैं।
अन्य विषय लेखन और बड़ी घटनाओं पर रोशनी डालते हैं। ‘लेखन का इतिहास’ में केरल में पांडुलिपि लेखन, ताड़पत्रों के प्रकार, ब्राह्मी लिपि, लेखन के तरीकों और चुरुना यानी ताड़पत्रों के संग्रहों की जानकारी है। ‘युद्ध और शांति’ में लड़ाइयों, संधियों और विद्रोहों सहित कई घटनाओं के अभिलेख हैं। मथिलकोम अभिलेख श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के रखरखाव से जुड़े हैं; इनमें मंदिर निर्माण, त्रिप्पदिदानम, उत्सवों और तहखानों के खुलने से संबंधित चुनिंदा प्रदर्शन भी शामिल हैं।
तिरुवनंतपुरम में संग्रहालय कैसे पहुँचें?

यह परिसर 1962 से केंद्रीय अभिलेखागार के रूप में काम कर रहा है। इससे पहले यहाँ केंद्रीय देशी अभिलेख कार्यालय था; और उससे भी पहले यह जेल और नायर सेना की छावनी था। यह संग्रहालय तिरुवनंतपुरम के उन संग्रहालयों में से एक है, जहाँ शहर के सांस्कृतिक संग्रहों की झलक मिलती है।

खुलने का समय और प्रवेश संबंधी जानकारी
प्रवेश निःशुल्क है। खुलने का समय बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले केरल राज्य अभिलेखागार विभाग की आधिकारिक जानकारी देख लें।
खुलने का समय
- मंगलवार से रविवार: 10:00–16:45
- सोमवार: बंद
आख़िरी बार नवंबर 2026 में जाँचा गया। छुट्टियों और विशेष आयोजनों के दौरान समय बदल सकता है।
संग्रहालय में प्रदर्शन पट्ट, विशेष वीडियो, क्यूआर कोड प्रणालियाँ और कलात्मक स्थापनाएँ हैं। केरल सरकार भी पांडुलिपियों और उनके ऐतिहासिक महत्व को समझाने वाली डिजिटल तकनीक और दृश्य-श्रव्य प्रदर्शनियों का उल्लेख करती है।
दूसरे दर्शनीय स्थलों के साथ यात्रा की योजना
संग्रहालय के विषय तिरुवनंतपुरम के सांस्कृतिक इतिहास पर केंद्रित पूरे दिन की सैर की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं। मथिलकोम अभिलेख संग्रह को श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जोड़ते हैं, जबकि दीर्घाओं में स्थानीय प्रशासन, लेखन और सामाजिक जीवन भी शामिल हैं। अपनी यात्रा के साथ किसी अन्य जगह जाने की योजना बनाने से पहले, उसके स्थान और खुलने के समय की अलग से जाँच कर लें।
